राजस्थान से पानी की रॉयल्टी पर कोर्ट जाएगी पंजाब सरकार:CM बोले- जो कहना है,वह कहें; चोर कभी नहीं कहता कि उसने चोरी की
पंजाब-हरियाणा के बीच एसवाईएल विवाद अभी कोर्ट में चल रहा है, वहीं अब पंजाब और राजस्थान के बीच पानी की रॉयल्टी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राजस्थान द्वारा रॉयल्टी को लेकर इनकार के बयान पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि वे इस मामले को लेकर कोर्ट जाएंगे।
कोर्ट में जाकर राजस्थान अपना पक्ष रखे। जो भी बताना है, वहाँ पर जाकर बता दे। हालाँकि, उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि चोर कभी नहीं कहता कि वह चोर है, लेकिन बाद में सारी बात कबूल लेता है।
“पहले तो वह ऐतराज़ ही करेंगे।”
20 मार्च को मुख्यमंत्री चंडीगढ़ में अपनी रिहाइश पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान मीडिया का सवाल था कि राजस्थान अब पानी की रॉयल्टी देने से इनकार कर रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा, “पहले तो वह ऐतराज़ ही करेंगे। चोर चोरी करने के बाद कोई व्यक्ति नहीं कहता कि मैंने चोरी की है। वह तो बाद में मनवाना पड़ता है। पकड़ा तो वह ट्रांसफार्मर से तेल चोरी के आरोप में जाता है, लेकिन बाद में 14-15 मोटरें चोरी करने और दो-चार मोटरसाइकिल चोरी करने की बात कबूल लेता है। उसी तरह हम कोर्ट केस लड़ेंगे। वह जो भी कहना है, कोर्ट में कह दे।”
इसके लिए पैसा मांग रहा पंजाब
18 मार्च को मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि 1960 से अब तक राजस्थान ने पंजाब से जाने वाले पानी का भुगतान नहीं किया है। उन्होंने तर्क दिया कि 1920 में ब्रिटिश काल के दौरान बीकानेर रियासत और पंजाब के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत पानी के बदले शुल्क देना तय था। राजस्थान ने 1960 तक भुगतान किया, लेकिन सिंधु जल संधि के बाद इसे बंद कर दिया। राजस्थान रावी, ब्यास या सतलुज के बेसिन में नहीं आता है, इसलिए उसे मुफ्त पानी पाने का कोई प्राकृतिक अधिकार नहीं है। अब तक 1.44 लाख करोड़ का बकाया है।
राजस्थान सरकार को चिट्ठी लिखी
भगवंत मान ने कहा, “हैरानी की बात है कि सतलुज-यमुना लिंक नहर के ज़रिए पानी की मांग करने वाला राज्य इस भारी बकाया भुगतान के मुद्दे पर चुप है। हमने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए राजस्थान सरकार को एक बैठक के लिए पत्र लिखा है। पंजाब इस मामले को मज़बूती से आगे बढ़ाएगा।”

