आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश की 29 ऑटो निर्माता कंपनियों को चिट्ठी लिखकर एक सप्ताह में स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या पुरानी गाड़ियों में ई-20 (20 फीसद एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) के इस्तेमाल सुरक्षित है? उन्होंने सरकारी प्रेस कांफ्रेंस में पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल सुरक्षित होने का दावा करने वाली टोयोटा, हीरो और मारूति को अलग चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने पूछा है कि आपका ओनर मैनुअल तो पुरानी गाड़ियों में किसी भी हाल में 10 फीसद एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल की अनुमति नहीं देता है। ऐसे में तीनों कंपनियां देश को लिखित में बताएं कि क्या पुरानी गाड़ियों में ई-20 सुरक्षित है और क्या माइलेज 4-5 फीसद ही कम होती है। साथ ही, क्या गाड़ी की माइलेज 5-10 फीसद से ज्यादा कम हुई या कोई कंपोनेंट खराब हुआ तो तीनों कंपनियां उपभोक्ता को हर्जाना देंगी?
अरविंद केजरीवाल ने दूसरी चिट्ठी 26 अन्य कंपनियों को लिखी है और इनसे साफ करने को कहा कि क्या आपकी पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल संभव है? इसके इस्तेमाल से गाड़ी की कितनी माइजेल गिरेगी और कितना नुकसान होगा? क्या किसी गाड़ी की माइलेज घटने या कोई कंपोनेंट खराब होने पर ऑटो कंपनियां उपभोक्ता को मुआवजा देंगी? साथ ही उन्होंने कहा कि गुरुवार को मैं ई-20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं राय जानने के लिए कुछ पेट्रोल पंपों, सर्विस सेंटर और मैकेनिक के पास जाऊंगा।
बुधवार को “आप” मुख्यालय पर पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के साथ प्रेसवार्ता कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मंगलवार को मैंने कहा था कि देश के सभी पेट्रोल बेस्ड टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर बनाने वाले ऑटो मैन्युफैक्चरर कंपनियों को मैं चिट्ठी लिखकर बोलूंगा कि वे अपना स्टैंड क्लियर करें कि क्या उनकी पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल किया जा सकता है? बुधवार को मैं 29 ऑटो मैन्युफैक्चरर कंपनियों को चिट्ठी लिख रहा हूं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 29 में से तीन कंपनियों को अलग चिट्ठी लिखी है और बाकी 26 को कंपनियों को अलग लिखी है। ये तीन कंपनियां मारुति, टोयोटा किर्लाेस्कर और हीरो हैं, जिन्होंने 4 जुलाई को सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अगर पुरानी गाड़ियों में ई-20 इस्तेमाल किया जाए, तो सुरक्षित है। सिर्फ गाड़ी की थोड़ी सी माइलेज गिरती है, तीन-चार या 5 फीसद, लेकिन गाड़ी को कोई नुकसान नहीं होता। इसलिए इन कंपनियों को अलग से चिट्ठी लिखी गई है।
अरविंद केजरीवाल बताया कि टोयोटा, मारुति और हीरो को लिखी चिट्ठी में कहा है कि आपने 4 जुलाई को सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल किया जा सकता है, 4-5 फीसद माइलेज कम होती है, लेकिन गाड़ी को नुकसान नहीं होता। लेकिन आपको ओनर मैनुअल कहता है कि किसी भी हालत में 2023 से पहले बनी पुरानी गाड़ियों में 10 फीसद से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इन दोनों स्थितियों में विरोधाभास है। इन कंपनियों की ओर से जारी ओनर मैनुअल, जो कंज्यूमर और कंपनी बीच एक एग्रीमेंट होता है, वह कुछ और कहता है और कंपनियों के प्रतिनिधि सरकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाकर कुछ और कहते हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह कोई मामूली भूल या विसंगति नहीं है। इन कंपनियों की वास्तविक स्थिति क्या है, वे इसे लिखित में देश के सामने सार्वजनिक करें। चिट्ठी मिलने के एक हफ्ते के अंदर ये कंपनियां स्पष्ट जवाब दें कि क्या पुरानी गाड़ियों में ई-20 पेट्रोल इस्तेमाल किया जा सकता है? क्या उसकी वजह से केवल 4-5 फीसद ही माइलेज कम होती है और क्या उसकी वजह से गाड़ी को कोई नुकसान नहीं होता? अगर ऐसा है तो उनसे दो प्रश्न पूछे गए हैं कि अगर किसी का 5 से 10 फीसद से ज्यादा माइलेज कम हुआ, तो क्या वे उस कंज्यूमर को मुआवजा देंगे? अगर ई-20 इस्तेमाल करने से किसी कंपोनेंट को नुकसान हुआ, तो क्या उस उपभोक्ता को कंपोनेंट का हर्जाना दिया जाएगा?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 26 अन्य कंपनियों को एक सामान्य चिट्ठी लिखी है। इसमें लिखा है कि उनके प्रोडक्ट को कई लोग इस्तेमाल करते हैं। तो वे अपना स्टैंड क्लियर करें। क्योंकि इस समय ई-20 को लेकर काफी विवाद चल रहा है। वे अपना स्टैंड क्लियर करें कि क्या उनकी 2023 से पहले की पुरानी गाड़ियों में ई-20 का इस्तेमाल किया जा सकता है? क्या उसकी वजह से माइलेज कम होगी? कम होगी तो कितनी होगी और क्या उसकी वजह से कोई नुकसान होगा?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर ये कंपनियां कहती हैं कि ई-20 सुरक्षित है, तो क्या माइलेज में कमी के नुकसान की वे भरपाई करेंगी और क्या कंपोनेंट के नुकसान की वे भरपाई करेंगी? मैं उम्मीद करता हूं कि सारी कंपनियां इसका जवाब देंगी क्योंकि यह सभी कंज्यूमर के लिए बहुत गंभीर मामला है। मुझे उम्मीद है कि एक हफ्ते के अंदर सभी कंपनियां इसका जवाब दें, क्योंकि सबके ओनर मैनुअल कुछ कहते हैं और सार्वजनिक रूप से कुछ कंपनियों ने कुछ और कहा है।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि गुरुवार को मैं कुछ पेट्रोल पंप, सर्विस सेंटर और कुछ मिस्त्रियों के यहां जाऊंगा। मैं लोगों से बात करूंगा कि वे क्या कहते हैं। सरकार तो जिद्द पर अड़ी हुई है कि वह ई-20 सबके ऊपर थोपेगी। सरकार कहती है कि यह सुरक्षित है, इससे कुछ नहीं होता, थोड़ी बहुत माइलेज कम होती है और इसकी वजह से कोई नुकसान नहीं हो रहा। लेकिन जनता क्या कह रही है, जनता का क्या अनुभव है?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बीच में ये लोग जनता को एंटी-नेशनल कहना शुरू कर देते हैं, कोई लॉबिंग कहना चालू कर देते हैं। अब तो ये देख रहे हैं कि इनके ही अपने बड़े-बड़े ब्लॉगर और बड़े-बड़े इन्फ्लुएंसर सोशल मीडिया पर इन्हें गालियां दे रहे हैं। इस तरह 140 करोड़ जनता को एंटी-नेशनल और आतंकवादी बोलना सही नहीं है। जब जनता अक्रॉस पार्टी लाइन दुखी है, तो एक जिम्मेदार सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता की आवाज को सुने। इनका यह फैसला विज्ञान, तर्क और इंजीनियरिंग के खिलाफ है। जाहिर तौर पर यह पब्लिक इंटरेस्ट में तो नहीं है। यह किसके इंटरेस्ट में है, यह अभी हम लोगों को समझ नहीं आ रहा है।

